आज का पंचांग।
आपके शहर के लिए दिन के पाँच अंग, सूर्योदय और सूर्यास्त, और कब शुरू करें या कब टालें। My Shrine ऐप वाले ही सूत्रों से गणना।

आज
- तिथि
- —
- नक्षत्र
- —
- योग
- —
- करण
- —
- वार
- —
- सूर्योदय
- —
- सूर्यास्त
- —
दिन के समय
- राहु काल
- —
- यमगंड
- —
- गुलिक काल
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- अभिजित मुहूर्त
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- ब्रह्म मुहूर्त
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पंचांग के अंग आपके चुने हुए शहर में सूर्योदय के समय के हैं, लाहिड़ी अयनांश के साथ। सभी समय भारतीय मानक समय में हैं।
पंचांग आपको क्या बताता है
- तिथि
चंद्र दिन: चंद्रमा सूर्य से जितना 12° आगे बढ़ता है, उतनी एक तिथि। तीस तिथियों का एक चंद्र मास होता है: शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तक, फिर कृष्ण पक्ष में अमावस्या तक।
- वार
सप्ताह का दिन, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हर वार का स्वामी एक ग्रह है: रविवार का सूर्य, सोमवार का चंद्र, और इसी तरह आगे।
- नक्षत्र
तारा: 27 नक्षत्रों में से चंद्रमा किसमें है। हर नक्षत्र के चार पाद (चौथाई भाग) होते हैं।
- योग
सूर्य और चंद्रमा के भोगांश को जोड़कर बनने वाले 27 योगों में से एक।
- करण
आधी तिथि। विष्टि (भद्रा) में परंपरा से नया काम शुरू नहीं किया जाता।
कब शुरू करें, और कब रुकें
- राहु काल
दिन के समय का आठवाँ हिस्सा, हर वार अलग हिस्सा। परिवार इसमें नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड और गुलिक
दिन के दो और आठवें हिस्से, जिनमें परंपरा से कोई नई शुरुआत नहीं की जाती।
- अभिजित मुहूर्त
स्थानीय दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट, जो ज़्यादातर शुरुआतों के लिए शुभ माने जाते हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय से 48 मिनट पहले खत्म होने वाले 48 मिनट: प्रार्थना और अध्ययन का पारंपरिक समय।
My Shrine कैलेंडर में और भी
- किसी भी दिन और किसी भी शहर का पूरा पंचांग, दिन के कालों की समय-रेखा के साथ।
- आपके शहर के लिए त्योहार और पवित्र काल, जैसे नवरात्रि या पितृ पक्ष, हर दिन का अर्थ और “9 में से दिन 3” के साथ।
- मुहूर्त खोजक: विवाह, गृह प्रवेश, वाहन और संपत्ति के मुहूर्त, दृक् नियमों से गणना, श्रृंगेरी शारदा पीठम् की प्रकाशित सूचियाँ, और हुब्बल्ली का मुहूर्त दर्पण, जो दिखाता है कि 16 में से कितने पंचांग सहमत हैं।
- आपके चुने हुए दिनों के लिए याद दिलाने वाले संदेश।
लोग क्या पूछते हैं
आज राहु काल कब है?
राहु काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय का आठवाँ हिस्सा है। कौन-सा आठवाँ हिस्सा, यह वार पर निर्भर है: रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा। आज का समय देखने के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।
पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त जगह के साथ बदलते हैं, और पंचांग दिन को सूर्योदय से गिनता है। इसलिए काल, और कभी-कभी दिन की तिथि या नक्षत्र भी, शहरों में अलग होते हैं।
यह कितना सही है?
सूर्योदय और सूर्यास्त लगभग एक मिनट तक सही निकाले जाते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण सूर्योदय के समय के हैं, लाहिड़ी अयनांश से, जैसा ज़्यादातर भारतीय पंचांग करते हैं। आपके परिवार के पुरोहित या स्थानीय पंचांग कोई अलग परंपरा मान सकते हैं।