साधना · 41 दिन का व्रत

अय्यप्पा मंडल व्रतम्।

सबरीमला की चढ़ाई से पहले इकतालीस दिन की प्रार्थना, सादा भोजन और मीठी वाणी।

अवधि
41 दिन
सीज़न
मध्य नवंबर से मध्य जनवरी
जप
स्वामिये शरणम् अय्यप्पा

यह व्रत क्यों रखें

मंडल व्रतम् सबरीमला यात्रा से पहले रखा जाने वाला 41 दिन का नियम है। आप सादगी से रहते हैं, दिन में दो बार प्रार्थना करते हैं और मन अय्यप्पा में लगाते हैं।

परंपरा के अनुसार व्रत के बाद ही यात्रा पूरी होती है। ये 41 दिन शरीर को पहाड़ की चढ़ाई के लिए और मन को दर्शन के लिए तैयार करते हैं।

यात्री एक-दूसरे को स्वामी कहते हैं और जाति, धन, पद छोड़कर एक-दूसरे में भगवान देखते हैं। गर्भगृह के ऊपर लिखा है “तत् त्वम् असि” — “तुम वही हो”।

कैसे शुरू करें

पहले दिन के पाँच कदम

  1. पहला दिन चुनें

    कई लोग मलयालम मास वृश्चिकम् के पहले दिन शुरू करते हैं, जब मंडल काल खुलता है। यात्रा से पहले 41 दिन गिनें।

  2. गुरु स्वामी खोजें

    एक अनुभवी यात्री आपके व्रत में मार्गदर्शन करते हैं, आपकी इरुमुडी बाँधते हैं और आपके समूह को पहाड़ पर ले जाते हैं।

  3. माला धारण करें

    पहले दिन स्नान करके मंदिर या अपने गुरु स्वामी के पास जाएँ। अय्यप्पा के लॉकेट वाली तुलसी या रुद्राक्ष की माला आशीर्वाद के साथ आपको पहनाई जाती है। तब से आप स्वामी हैं।

  4. सादे कपड़े पहनें

    41 दिन काले, नीले या केसरिया कपड़े पहनें।

  5. संकल्प लें

    अपने शब्दों में अय्यप्पा से वचन लें कि सबरीमला से लौटने तक व्रत निभाएँगे।

पहली बार? आप कन्नि स्वामी हैं। आपके गुरु स्वामी बताएँगे कि आपका समूह कौन-से रिवाज़ मानता है।

हर दिन

41 दिनों तक हर दिन यही सादी दिनचर्या

सुबह

  • सूर्योदय से पहले स्नान. ठंडे पानी से स्नान, फिर माथे पर विभूति या चंदन।
  • दीपक जलाएँ. अय्यप्पा के चित्र के आगे दीपक जलाएँ और फूल चढ़ाएँ।
  • शरणम् जपें. “स्वामिये शरणम् अय्यप्पा” 108 बार कहें, या शरण घोष गाएँ।

दिन भर

  • सादा शाकाहारी भोजन करें. घर का बना सात्त्विक भोजन। कई लोग दिन में एक ही पूरा भोजन करते हैं।
  • नम्रता से बोलें. न क्रोध, न झूठ, न कठोर शब्द। सबको स्वामी कहें।

शाम

  • शाम को स्नान. शाम की प्रार्थना से पहले फिर स्नान करें।
  • शाम की प्रार्थना. फिर दीपक जलाएँ, शरणम् जपें और हरिवरासनम् जैसा भजन गाएँ।
  • चटाई पर सोएँ. ज़मीन पर चटाई या पतली चादर बिछाकर सोएँ।
नियम

पालन करें

  • लौटने तक दिन-रात माला पहने रहें।
  • दिन में दो बार स्नान करें और घर साफ़ रखें।
  • शाकाहारी भोजन करें, जहाँ तक हो सके घर का बना।
  • विचार और कर्म में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • जितना हो सके नंगे पाँव चलें।
  • मंदिर जाएँ और दूसरे स्वामियों के साथ भजन में शामिल हों।
 

इनसे दूर रहें

  • शराब, तंबाकू, मांस, मछली और अंडे।
  • बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना।
  • क्रोध, निंदा और कठोर शब्द।
  • पार्टियाँ और सैर-सपाटे जो मन भटकाएँ।

रिवाज़ परिवारों और समूहों में अलग होते हैं। जहाँ वे इस सूची से अलग हों, गुरु स्वामी की बात मानें। परिवार में जन्म या मृत्यु हो तो गुरु स्वामी से पूछें कि क्या करें।

इरुमुडी और यात्रा

निकलने से पहले गुरु स्वामी इरुमुडी बाँधते हैं — सिर पर रखी जाने वाली दो हिस्सों की कपड़े की गठरी। आगे के हिस्से में घी भरे नारियल के साथ अय्यप्पा के लिए चढ़ावा होता है। पीछे के हिस्से में रास्ते का भोजन।

केवल इरुमुडी लिए स्वामी ही 18 पवित्र सीढ़ियाँ — पदिनेट्टाम पडी — चढ़कर गर्भगृह तक जाते हैं।

घर लौटने के बाद व्रत पूरा होता है। मंदिर में या घर पर प्रार्थना के साथ माला उतारी जाती है।

मंदिर की परंपरा के अनुसार 10 से 50 वर्ष की लड़कियाँ और महिलाएँ सबरीमला नहीं चढ़तीं। परिवार अक्सर घर पर व्रत का सादा भोजन और प्रार्थना साथ निभाते हैं। यात्रा की योजना से पहले मंदिर की ओर से दी गई वर्तमान प्रवेश और बुकिंग जानकारी देखें।

सीज़न

सबरीमला कब खुला रहता है

मंदिर मंडल–मकरविलक्कु सीज़न के लिए वृश्चिकम् के पहले दिन, यानी मध्य नवंबर से, मध्य जनवरी में मकरविलक्कु तक खुलता है। यह हर मलयालम मास के शुरू के कुछ दिनों में और विषु पर भी खुलता है। My Shrine ऐप सबरीमला मंदिर के पेज पर इस सीज़न की तारीख़ें दिखाता है।

सबरीमला कैसे पहुँचें

वहाँ तक का रास्ता

यह मार्गदर्शिका सबरीमला के प्रचलित रिवाज़ों पर आधारित है। यह नियम-पुस्तक नहीं है: गुरु स्वामी का मार्गदर्शन पहले है।

सवाल

लोग क्या पूछते हैं

41 दिन का व्रत क्यों?

परंपरा के अनुसार व्रत के बाद ही यात्रा पूरी होती है। ये 41 दिन शरीर को पहाड़ की चढ़ाई के लिए और मन को दर्शन के लिए तैयार करते हैं।

मंडल व्रतम् कब शुरू करूँ?

कई लोग मलयालम मास वृश्चिकम् के पहले दिन, मध्य नवंबर में, शुरू करते हैं, जब मंडल काल खुलता है। यात्रा से पहले 41 दिन गिनें।

गुरु स्वामी कौन हैं?

एक अनुभवी यात्री, जो आपके व्रत में मार्गदर्शन करते हैं, आपकी इरुमुडी बाँधते हैं और आपके समूह को पहाड़ पर ले जाते हैं।

इरुमुडी क्या है?

सिर पर रखी जाने वाली दो हिस्सों की कपड़े की गठरी। आगे के हिस्से में घी भरे नारियल के साथ अय्यप्पा के लिए चढ़ावा होता है; पीछे के हिस्से में रास्ते का भोजन। केवल इरुमुडी लिए स्वामी ही 18 पवित्र सीढ़ियाँ चढ़ते हैं।

दिनचर्या में बाधा आए तो?

आगे कैसे बढ़ना है, यह तय करने से पहले गुरु स्वामी को अपनी परिस्थिति बताएँ। यह मार्गदर्शिका दोबारा शुरुआत या दंड नहीं बताती।

सबरीमला दर्शन कैसे बुक करें?

यात्रा से पहले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की वर्चुअल क्यू पर समय बुक करें, और पहचान पत्र और बुकिंग साथ रखें।

MY SHRINE

iPhone और Android पर मुफ़्त।

आपकी कुंडली, पंचांग, मंदिर और यात्रा योजना मुफ़्त हैं। पूजा, कलाएँ और यात्राएँ My Shrine टीम के साथ बुक होती हैं, और भुगतान से पहले आप मूल्य देख लेते हैं।

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